नीति श्लोक Niti Slok

नीति श्लोक:- अकर्त्तव्येष्वसाध्वीव तृष्णा प्रेरयते जनम्|
तमेव सर्वपापेभ्यो लज्जा मातेव रक्षति ||

तृष्णा मनुष्य को बुरी स्त्री के समान न करने योग्य कार्यों में लगा देती है,

परन्तु इसके विपरीत लज्जा मनुष्य को माता के समान सभी पापों से बचाए रखती है|

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