नीति श्लोक in Hindi

अकृत्वा परसन्तापमगत्वा खलनम्रताम्|
अनुत्सृज्य सतां मार्गं यत्स्वल्पमपि तद् बहु||

In Hindi

दूसरों को कष्ट न पहुंचा कर और दुष्टों के सम्मुख बिना गिडगिडाए यदि सज्जनों के मार्ग पर हम चल सकें,

तो जीवन में इतना किया कार्य भी बहुत लाभप्रद होगा|

In English

Without hurting others and without prejudice to the wicked,
if we can walk on the path of the gentlemen, So much work done in life will be very beneficial too.

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