कबीर के दोहे अर्थ सहित: Kabir ke  Dohe in Hindi

कबीर के दोहे अर्थ सहित: Kabir ke Dohe in Hindi

चिंता ऐसी डाकिनी, काटि करेजा खाए

वैद्य बिचारा क्या करे, कहां तक दवा खवाय॥

अर्थात चिंता ऐसी डाकिनी है, जो कलेजे को भी काट कर खा जाती है। इसका इलाज वैद्य नहीं कर सकता। वह कितनी दवा लगाएगा। वे कहते हैं कि मन के चिंताग्रस्त होने की स्थिति कुछ ऐसी ही होती है, जैसे समुद्र के भीतर आग लगी हो। इसमें से न धुआं निकलती है और न वह किसी को दिखाई देती है। इस आग को वही पहचान सकता है, जो खुद इस से हो कर गुजरा हो।

That is, anxiety is such a duckini, which also bites the liver. It can not be treated properly. How much medicine would he use? 
They say that the situation of anxiety of the mind is similar, as if there is a fire within the sea. There is no smoke in it, 
     nor does it appear to anyone. This can only recognize the fire itself, which itself has passed through it.

Leave a Reply

Close Menu