कबीर के दोहे अर्थ सहित: Kabir ke Dohe in Hindi

चिंता ऐसी डाकिनी, काटि करेजा खाए वैद्य बिचारा क्या करे, कहां तक दवा खवाय॥ अर्थात चिंता ऐसी डाकिनी है, जो कलेजे को भी काट कर खा जाती है। इसका इलाज…

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Kabir Ke Dohe in Hindi

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय,ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय। अर्थ : बड़ी बड़ी पुस्तकें पढ़ कर संसार में कितने ही लोग मृत्यु के…

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Kabir Ke Dohe in hindi

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय,जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय। अर्थ : जब मैं इस संसार में बुराई खोजने चला तो मुझे कोई बुरा…

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